Subhas Chandra Biography In HIndi I सुभास चंद्र बोस बायोग्राफी इन हिंदी

भारत देश की आज़ादी मे जितना योगदान महात्मा गाँधी और जवाहर लाल नेहरू जैसे गरम दल के नेताओं का था उतना ही योगदान गर्म दल के नेताओं का भी थ। और जब बात हो रही हो गर्म दाल के नेताओं की तो उसमें सबसे पहला नाम आता है नेताजी सुभासचन्द्र बोस का नेताजी सुभासचन्द्र बोस एक ऐसे क्रांतिकारी के रूप में जाने जाते है जिनका जीवन आज तक दुनिया के लिए रहस्य बना हुआ है ऐसे में आज के इस पोस्ट Subhas Chandra Bose Biography In Hindi सुभास चंद्र बोस बायोग्राफी इन हिंदी मे हम आपका नेताजी सुभासचन्द्र बोस के जीवन से आपका परिचय करवाने वाले हैं I

सबसे पहले आइये हम एक निर्भीक देशभक्त और भारत माता के सच्चे सिपाही, सुभाष चन्द्र बोस के ऐतिहासिक जीवन चक्र पर एक हल्की नज़र डाल लेते है-

साल 1897 – में ओडिसा के कटक शहर में जन्म हुआ।
साल 1918 – में उन्होंने दर्शनशास्त्र से बीए की डिग्री हासिल की।
साल 1921 – में भारत वापस लौटे और भरतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के सदस्य बनें।
साल 1937 – में एमिली स्चेंकल से शादी की।
साल 1939 – में आई एन सी के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया।
साल 1943 – में आई इन ए को दोबारा गठित किया।
साल 1945 – में इस दुनिया को सदा के लिए छोड़ गए।

“इतिहास में कोई भी बदलाव सिर्फ़ बातें कर के कभी नहीं लाया जा सका है।”- सुभाष चन्द्र बोस

जिस तरह के सुभाष चन्द्र बोस जी के विचार थे उसी तरह के ही निर्भीक और गरम स्वभाव वाले वो व्यक्ति भी रहे हैं। अपने इसी स्वभाव और विचार के दम पर उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए, अंग्रेजो को नाकों चने चबवा दिए थे। सुभाष चन्द्र बोस को उनकी फ़ौज के लिए भी याद किया जाता है। जिसके बलबूते वो अंग्रेज़ो का डटकर मुकाबला करते थे।

सुभाष चन्द्र बोस ने ‘भारतीय राष्ट्रीय सेना’ का गठन कर के अंग्रेज़ो से आज़ादी छीनने का लिए काफ़ी संघर्ष किया था। सुभाष चन्द्र बोस और महात्मा गाँधी का मकसद तो एक ही था, लेकिन दोनों के रास्ते अलग-अलग थे। जहाँ गाँधी जी आज़ादी की लड़ाई सत्य और अहिंसा के बल पर जीतना चाहते थे, वहीं सुभाष चन्द्र बोस अपने हक की आज़ादी के लिए लड़ने में विश्वास रखते थे। इसी वज़ह से दोनों महापुरुषों के विचार में काफ़ी मतभेद भी हुआ करता था।

कटक से लंदन का सफर-

सुभाष चन्द्र बोस के जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिसा के कटक शहर में हुआ था। उनके पिता जानकीनाथ बोस एक वक़ील थे। सुभाष जी की माता का नाम प्रभावती देवी था।
वो अपने 8 भाई और 6 बहनों में 9वें स्थान पर थे।
सुभाष चन्द्र बोस की स्कूली पढ़ाई सन 1902 में प्रोटेस्टेंट यूरोपियन स्कूल से शुरू हुई थी। वहाँ वो अपने भाई बहनों के साथ पढ़ने के लिए जाते थे। बाद में साल 1909 में उनका प्रवेश रावेंशॉ कॉलीगेट स्कूल में करा दिया गया था।अपनी 10वीं तक को पढ़ाई कटक से पूरी करने के बाद सुभाष जी कलकत्ता चले गए। इसके बाद उन्होंने सन 1918 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री हासिल की। इसके बाद साल 1919 में वो आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड के कैम्ब्रिज शहर चले गए।

इंगलैंड में बने आईएएस लेकिन दे दिया इस्तीफा –

वहाँ उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा में हो गया।इस परीक्षा में उन्होंने पूरे देश मे चौथा स्थान हासिल किया था। लेकिन साल 1921 में जलियावाला बाग में हुए नरसंहार को देखकर उनका मन विचलित हो उठा। उन्होंने इस पद से इस्तीफ़ा दे दिया। साथ ही उन्होंने अँग्रेजी प्रशासन के लिए काम करने से भी मना कर दिया। इंडियन सिविल सर्विसेज के पद से इस्तीफा देने के वाद सुभाष चन्द्र बोस भारत लौट आये। यहाँ आकर उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की सदस्यता हासिल की। फ़िर उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु चितरंजन दास द्वारा शुरू किए गए समाचार पत्र ‘स्वराज’ को दोबारा से जीवित करने की दिशा में काम करना शुरू किया। इसके 2 साल बाद 1923 में, सुभाष चन्द्र बोस लो ऑल इंडिया यूथ काँग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। साल 1925 में उन्हें जेल भी जाना पड़ा, फ़िर 1927 में अंग्रेज़ी प्रशासन ने उन्हें रिहा कर दिया।

आज़ादी की लड़ाई और जय हिन्द का नारा –

इसके बाद वो यूरोप की यात्रा पर निकल गए और 1935 में ‘द इंडियन स्ट्रगल’ नाम की किताब को प्रकाशित किया। यूरोप से वापस लौटने के बाद साल 1937 और 1939 में सुभाष चन्द्र बोस को दो बार काँग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। साल 1939 में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उन्होंने ‘पूर्ण स्वाधीनता’ की माँग उठायी। जिसके चलते अँग्रेजी प्रशासन ने उनके नाम गिरफ्तारी वारेंट जारी कर दिया। तब सुभाष चन्द्र बोस पेशावर, अफ़ग़ानिस्तान और रूस के रास्ते बर्लिन जा पहुँचे। बर्लिन में रहते हुए उन्होंने भारत की आज़ादी के लिए बहुत से महत्वपूर्ण कार्य किये। साल 1943 में नेता जी बर्लिन से जापान पहुँच गए।

द्वितीय विश्वयुद्ध के समय सुभाष चन्द्र बोस ने भारतीय सेना द्वारा अंग्रेजो का सहयोग किये जाने पुरज़ोर विरोध किया था। जापान में रहते हुए सन 1943 में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय सेना का गठन किया।  इसी समय उन्होंने ‘तुम मुझे खुन दो मैं तुम्हे आज़ादी दूँगा’ तथा ‘जय हिंद’ का नारा भी दिया था। उनकी इस फ़ौज ने इम्फाल और कोहिमा में अंग्रेज़ो के विरुद्ध लड़ाई भी लड़ी थी। साल 1943 में ही बोस ने अंडमान निकोबार में भी आईएनए की शुरुआत की थी।

साल 1937 में की शादी-

साल 1937 में सुभाष चन्द्र बोस ने चुपके से एमिली स्चेंकल से शादी कर ली। 24 नवम्बर 1942 को उनकी एक बेटी भी हुई, जिनका नाम अनिता बोस था। अनिता इस समय जर्मनी की मशहूर अर्थशास्त्री के रूप में जानी जाती हैं।

आखिरी समय- 

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु के राज से अभी तक पर्दा नहीं उठ सका है। लेकिन अधिकतर लोगों का मानना है कि 18 अगस्त 1945 को ताईवान में हुए प्लेन क्रैश में उनकी मौत हो गयी थी। वहीं बहुत से लोग ये मानते है कि उस प्लेन क्रैश में नेताजी सुरक्षित बच गए थे। वहाँ से बचने के बाद वो ताईवान में ही रहने लगे गए थे।
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को ना सिर्फ़ सच्चे सिपाही के रूप में याद किया जाता है, बल्कि उन्हें एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में भी सम्मान दिया जाता है। भले ही महात्मा गाँधी से उनके विचार मेल नहीं खाते थे, लेकिन गाँधी जी द्वारा खुद उन्हें ‘देशभक्तों के देशभक्त’ की उपाधि दी गयी थी। गाँधी जी भी नेताजी के बहुत सम्मान करते थे

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