IFS Full Form and Meaning in Hindi Language

 

IFS की फुल फॉर्म क्या होती है?

IFS की अंग्रेजी में फुल फॉर्म Indian Foreign service होती है और इसे हिंदी में भारतीय विदेश सेवा के नाम से जाना जाता हैं।

Indian Foreign service (IFS) क्या होता है?

Indian Foreign service (IFS) भारतीय सरकार की एक प्रकार की कार्यकारी शाखा है जो केंद्रीय सिविल सेवाओं के तहत है और यह यूपीएससी के द्वारा एक अपेक्षित समूह ए और समूह बी है जो एक प्रकार से प्रशासनिक राजनयिक सिविल सेवा है। यह सेवा भारतीय विदेश सेवा के विदेशों में मौजूद अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करती है। यह एक प्रकार की राजनयिक सेवा होती है। यह सेवा विदेशों में भारत के बाहरी मामलों की देखरेख करती है। यह सेवा एक IFS अधिकारी के दायरे में भारत के कूटनीति, व्यापार और संस्कृति से संबंधित मामलों को विदेशों में अच्छी तरह से संभालने का कार्य करती है। वर्तमान समय मे भारत के IFS अधिकारी दुनिया के 162 से भी अधिक देशों में इंडियन डिप्लोमेटिक मिशन पर कार्य कर रहे है। IFS दो सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा के पदों में से एक माना जाता है। इस पद को पाने के बाद आप यूपीएससी की परीक्षा दोबारा नहीं दे सकते हैं। सबसे प्रतिष्ठित पद में से पहला पद IAS अधिकारी का होता है। IFS पद को लिए केवल वो लोग ही जॉइन कर सकते है जिन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में टॉप किया हो, केवल उन्हीं को Indian Foreign service (IFS) में जाने का मौका मिलता है। जिस IFS को विशिष्ट वन अधिकारी के पद के लिए आवेदन करना हो उसका एक संरक्षणवादी होना बहुत ही आवश्यक होता है। एक IFS अधिकारी सुपरवाइजर, अर्थशास्त्री, तकनीशियन एवं योग्य प्रशासक होना चाहिए। एक IFS अधिकारी का उस समय संवेदनशील होना बहुत आवश्यक होता है जब उसे वन्य जीवन या किसी प्राकृतिक स्थान को समझने के लिए भेजा जाता है। जब IFS अधिकारी को इस प्रकार का कार्य करने के लिए भेजा जाता है तो उसपर तस्करों, शिकारियों चोरों का खतरा बना हुआ रहता है। भारत के वन अधिकारी के संवर्ग में कुछ रैंक भी होते हैं जैसे कि सहायक वन संरक्षक, जिला वन संरक्षक, वन संरक्षक, प्रमुख वन संरक्षक, प्रधान वन संरक्षक, वन महानिरीक्षक आदि।

Indian Foreign service (IFS) का इतिहास क्या है?

भारत में Indian Foreign service (IFS) का इतिहास बहुत ही पहले से है और इसकी शुरुआत ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा वर्ष 1783 में हुई थी। Indian Foreign service (IFS) को अच्छे से विकसित करके 9 अक्टूबर 1946 को लागू किया गया था।

Indian Foreign service (IFS) के लिए पात्रता क्या है?

जो भी भारतीय स्टूडेंट हो जिसने अपनी किसी भी विषय में ग्रेजुएशन पूरी कर ली है वो IFS और उससे जुड़े अन्य 24 पदों के लिए आयोजित किए जाने वाले upsc के सिविल सर्विस परीक्षा में आवेदन करने के लिए पात्र होता है। इसमें आवेदन करने के लिए उस व्यक्ति की उम्र कम से कम 21 वर्ष और अधिक से अधिक 32 वर्ष होनी अनिवार्य है। इसमें अधिकतम आयु को अलग अलग श्रेणियों के अनुसार 3 से 5 वर्ष तक की छूट भी दी है। यदि कोई व्यक्ति जनरल श्रेणी से है तो वो अधिक से अधिक 6 बार IFS की परीक्षा के लिए आवेदन कर सकता है और यदि कोई व्यक्ति OBC की श्रेणी से है तो वह 9 बार IFS की परीक्षा के लिए आवेदन कर सकता है। वहीं SC/ST की श्रेणी वाले व्यक्ति के लिए कोई उम्र की सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

Indian Foreign service (IFS) का एग्जाम किस प्रकार से होता है?

IFS की पद पर भर्ती करने के लिए UPSC द्वारा द्वारा परीक्षा का आयोजन किया जाता है और इस परीक्षा के तीन निम्नलिखित चरण होते है:

  1. प्रिलिमनरी
  2. मेंस एग्जाम
  3.  इंटरव्यू

Indian Foreign service (IFS) की वेतन कितनी होती है?

एक IFS अधिकारी की वेतन एक ISS अधिकारी के इतनी ही होती है। शुरुआत में इंडियन फॉरेन सर्विस अधिकारी को 50000 रुपये से लेकर 70000 रुपए के बीच हर महीने मिल सकते है और इसी के साथ जिस देश में IFS अधिकारी की पोस्टिंग लगती है उसी देश की करेंसी के अनुसार से उसे अलग से हर महीने 200000 रुपए से 300000 रुपए मिलते है।

Indian Foreign service (IFS) ऑफिसर के पोस्ट और जिम्मेदारियां क्या होती है?

  • एक IFS की मुख्य जिम्मेदारी अधिकारी को भारत के दूतावास, उच्च आयोगों, वाणिज्य दूतावास और संयुक्त राष्ट्र जैसे अन्य बहुपक्षीय संगठनों में स्थायी मिशनों का प्रतिनिधित्व करना होती है।
  • एक IFS अधिकारी को NRI और POI के साथ मिलकर एक मैत्रीपूर्ण संबंध को बढ़ावा देने का कार्य करना होता है।
  • IFS अधिकारी की पोस्टिंग किसी अन्य देश में भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए की जाती है।
  • IFS अधिकारी की जिस भी देश में पोस्टिंग की जाती है उसे उसके साथ एक मैत्रीपूर्ण संबंध बनाकर रखना होता है।
  • एक IFS अधिकारी को विदेशी और भारतीय नागरिकों को विदेश में कॉउंसिल की सुविधाएं भी प्रदान करनी होती है।
  • IFS अधिकारी की पोस्टिंग अन्य देशों के इसलिए भी की जाती है ताकि भारत में विकास और नई नीतियों पर सटीक रिपोर्टिंग की जा सके और भारत की नीतियों के निर्माण को और अच्छा बनाया जा सके।
  • एक IFS अधिकारी की जिस देश में पोस्टिंग होती है उसे वहां के अधिकारियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर समझौता और बातचीत करनी होती है।

Indian Foreign service (IFS) अधिकारी कैसे बन सकते है?

Indian Foreign service (IFS) को जॉइन करने के लिए आपको सबसे पहले इसके सभी मापदंडों को पूरा करना पड़ता है और इसके बाद ही आप इसकी परीक्षा देने के लिए पात्र होते है। जो लोग इस परीक्षा में उत्तीर्ण होते है केवल उन्हें ही Indian Foreign service (IFS) को जॉइन करने का मौका प्राप्त होता है। Indian Foreign service (IFS) बनने की प्रक्रिया निम्नलिखित है:

  1. अपनी ग्रेजुएशन पूरी करें: सबसे पहले आपको कोई सी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में बहुत ही अच्छे अंकों के साथ अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त करनी पड़ती है और इसके साथ साथ आपको Indian Foreign service (IFS) की परीक्षा की तैयारी करने की आवश्यकता पड़ती है।
  2. IFS परीक्षा फॉर्म के लिए अप्लाई करे: अपनी ग्रेजुएशन अच्छे से पूरी करने के बाद आपको IFS की परीक्षा के लिए आवेदन करना होगा। इस परीक्षा के लिए आवेदन देने के बाद आपको इसकी खूब जमकर तैयारी करनी होती है क्योंकि यह परीक्षा बहुत मुश्किल होती है और यह UPSC द्वारा कराई जाती है।
  3. IFSC की परीक्षा का आवेदन फॉर्म भरने के लिए आपको UPSC की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा और वहां जाकर आपको IFS की परीक्षा का फॉर्म भरना होगा। इस परीक्षा हो हर वर्ष UPSC द्वारा आयोजित किया जाता है। IFS की परीक्षा हर वर्ष फरवरी या मार्च के महीने में आयोजित कराई जाती है। 
  4. जो भी आवेदक इस परीक्षा में उत्तीर्ण होते हैं केवल उन्हें ही आगे की ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है। 
  5. IFS की ट्रेनिंग के बाद आवेदकों को विदेश मंत्रालय व दूसरे देशों में भारतीय दूतावास के रूप में काम करने भेज दिया जाता है।

Indian Foreign service (IFS) की परीक्षा का पैटर्न कैसा होता है?

IFS की परीक्षा का पैटर्न इसकी तैयारी करने के लिए बहुत ही लाभदायक साबित होता है क्योंकि इससे आपको थोड़ा आईडिया लग जाता है कि IFS की परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं। आपको यह भी पता लग जाता है कि IFS की परीक्षा कितने चरणों में होती है। Indian Foreign service (IFS) की परीक्षा 3 चरणों में ली जाती है। इस परीक्षा को पहले दो चरण में लिखित रूप से आयोजित किया जाता है और तीसरे चरण की परीक्षा में आपका इंटरव्यू लिया जाता है। IFS की पहले चरण में ली जाने वाली परीक्षा को प्रारंभिक परीक्षा बोला जाता हैं और इसके दूसरे चरण की परीक्षा को मुख्य/मैन परीक्षा बोला जाता हैं और इस परीक्षा के आखिरी चरण में आपका इंटरव्यू लिया जाता है।

  • पहला चरण (प्रारंभिक परीक्षा): प्रारंभिक परीक्षा में दो प्रकार के प्रश्न पत्र दिए जाते हैं और इन दोनों प्रश्न पत्र में आपसे ऑब्जेक्टिव/विज्ञापनिव प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं। IFS की परीक्षा में मुख्य रूप से आपसे जनरल नॉलेज, इतिहास, भूगोल, भारतीय और विदेशीय नीति, भारतीय संस्कृति, भारतीय अर्थव्यवस्था, नई टेक्नोलॉजी, करंट अफेयर्स से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • दूसरे चरण में आपसे अंग्रेजी में रीजनिंग और एटीट्यूड जैसे विषय से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं और दूसरे पेपर को को या मुख्य परीक्षा को देने के लिए आपके पहली परीक्षा के अंक नहीं गिने जाते हैं लेकिन इस परीक्षा में आपको कम से कम 35% से 40% तक अंक लाने हीहोते है। प्रारंभिक परीक्षा को देने के बाद आपसे एक और फॉर्म भराया जाता है जिसमें आपको अपनी आपकी सारी जानकारी और आप जिस पद के लिए आवेदन करना चाहते हैं उसके बारे में भरना पड़ता है।
  •  दूसरा चरण (मुख्य परीक्षा): IFS की इस मुख्य परीक्षा में 9 प्रश्न पत्र दिए जाते हैं और इसमें हर प्रश्न पत्र विभिन्न विषय का होता है। इस मुख्य परीक्षा में आपसे पहले प्रश्न पत्र में आचार विचार और नैतिकता से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे और 3 प्रश्न पत्र में आपसे जनरल नॉलेज से जुड़े प्रश्न पुछे जाते हैं और इसमें आपसे एक प्रश्न पत्र में अंग्रेजी या हिंदी जैसे विषय से जुड़ा पुछे जाते है। इसके अलावा एक प्रश्न पत्र में आपके निबंध का उत्तर देना होता हैं।
  • तीसरे चरण (इंटरव्यू): जो भी आवेदक इन दोनों, प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाते हैं उन्हें तीसरे चरण यानी इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। आपका इंटरव्यू इस परीक्षा का आखिरी चरण है और अगर आप इसमें सफल हो जाते है तो आपको सर्विस अलर्ट किया जाता है। 

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