Dr Abdul Kalam Biography | डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जीवनी

मिसाइल मैन

आज के इस पोस्ट में हम आपका परिचय भारत के मिसाइल मैन के रूप में मशहूर एक ऐसे शख्स से करवाने वाले है जिसने अपना सम्पूर्ण जीवन सिर्फ सीखने, पढ़ने और भारत को मजबूत बनाने के लिए समर्पित कर दिया जी हाँ आपने बिल्कुल सही समझा हम बात कर रहे हैं भारत के महान वैज्ञानिक मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की आपको जानकर हैरानी होगी की उनके मरने के बाद उनके पास संपत्ति के नाम पर सिर्फ कुछ किताबें I तो चलिए, आज के इस पोस्ट डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जीवनी – APJ Abdul Kalam Biography In Hindi के माध्यम से एपीजे अब्दुल कलाम जी के बारे में जानने वाले हैंI

तो चलिए पहले एक नजर हम ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर, भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे कलाम के जीवन सफर पर डाल लेते है- 

साल 1931:  में तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्म हुआ।
साल 1969: में SLV-III के प्रॉजेक्ट निर्देशक के तौर पर इसरो में शामिल हुए।
साल 1982 – में डीआरडीओ में IGMDP के हेड के रूप में शामिल हुए।
साल 1997 – में भारत रत्न से सम्मानित हुए।
साल 2002 – में भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में चुने गए।
साल 2015 – में इस दुनिया को अलविदा कह गए।

सफ़लता का जश्न मनाने के लिए इंसान को अपनी कठिनाइयों का सामना करना जरूरी होती है।  – डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम

डॉक्टर ए. पी. जे. अब्दुल कलाल ना सिर्फ़ भारत के राष्ट्रपति के रूप में जाने जाते हैं, बल्कि वो एक महान वैज्ञानिक के रूप में भी जाने जाते हैं।  भारत के अन्तरिक्ष अभियान में अपने अमूल्य योगदान और रक्षा के क्षेत्र में मज़बूत बनाने के लिए उन्हें ‘मिसाइल मैन’ के नाम से भी जाना जाता है। इसरो और डीआरडीओ जैसी देश की बड़ी और महत्वपूर्ण संस्थाओं के विकास में उन्होंने अपना अमूल्य योगदान दिया है।  उन्होंने अपने योगदान से भारत को ना सिर्फ़ दुनिया के शक्तिशाली देशों की सूची में शामिल किया है बल्कि साथ ही अन्तरिक्ष में भी के क्षेत्र में भी भारत की स्थिति मज़बूत की है।

न्यूजपेपर बेचने से न्यूजपेपर में आने तक का सफर-

अवुल पकिर जैनुलाद्दीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ था।  उनके पिता का नाम जैनुलाद्दीन और माता का नाम आशियम्मा था। उनका जन्म बेहद ग़रीब परिवार में हुआ था। कलाम के पिता समुद्र में नाव चलाते थे साथ ही वो मस्ज़िद में इमाम भी थे। बचपन मे पिता की आर्थिक मदद करने के लिए कलाम न्यूज़पेपर भी बेचा करते थे।

बचपन मे कलाम पढ़ाई में औसत छात्र ही थे, लेकिन वो कोई भी काम बहुत मेहनत और लगन से करते थे। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई रामानंतपुराम से ही की थी। इसके बाद उन्होंने साल 1954 में तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज से भौतिक विज्ञान में अपना स्नातक पूरा किया। साल 1955 में उन्होंने मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की। कलाम जी ने अपनी पूरी ज़िंदगी सिर्फ़ देश के नाम समर्पित कर दी। वो ख़ोज और विज्ञान के कार्यों में इतने व्यस्त थे कि उन्होंने अपनी शादी भी नहीं की । मृत्यु के समय उनके पास कोई कुछ किताबो और वीणा के अलावा कोई और सम्पत्ति भी नही थी।

असफलता से सफलता का सफर- 

ए. पी. जे. कलाम फाइटर पॉयलट बनना चाहते थे, लेकिन इसके मेडिकल परीक्षण में फेल होने के कारण वो पॉयलट नहीं बन सके। अगर वो पॉयलट बन जाते तो शायद देश को इतना महान वैज्ञानिक और ‘मिसाइलमैन’ ना मिल पाता। पॉयलट की परीक्षा में असफ़ल होने के बाद कलाम जी ने डीआरडीओ में एक वैज्ञानिक के रूप में काम करना शुरू किया। साल 1960 में उन्होंने विक्रम साराभाई के संरक्षण में स्पेस रिसर्च की भारतीय राष्ट्रीय कमेटी (INCOSPAR) में काम करना शुरू किया। इसके बाद साल 1969 में उन्होंने SLV-III के प्रॉजेक्ट निदेशक के तौर पर इसरो में शामिल हुए। ये भारत का पहला सेटेलाइट लॉन्च वेहिकल था।
इसके बाद डॉक्टर कलाम ने इसरो के बहुत से प्रॉजेक्ट पर काम किया। उन्होंने देश को शॉर्ट रेंज की बहुत सी मिसाइलें बनाकर दी हैं। उन्होंने हवा से हवा में मार करने वाली पृथ्वी मिसाइल भी बनाकर देश की सुरक्षा बढ़ाने का काम किया। साल 1982 में वो दोबारा से डीआरडीओ में शामिल हुए इस बार वो इसके हेड चुने गए।
साल 1992 से 1999 तक वो रक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिकी सलाहकार रहे, फ़िर बाद में उन्होंने भारत सरकार के वैज्ञानिकी सलाहकार के रूप में काम किया। इसी पद पर रहते समय उन्होंने पोखरण में हुए दूसरे न्यूक्लियर परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।  इसके सफ़ल परीक्षण के बाद उन्हें देश भर में खूब सराहा गया और रातों रात वो काफ़ी मशहूर हो गए।

दयालु राष्ट्रपति- 

साल 2002 में उन्हें भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में चुना गया। अपने राष्ट्रपति के कार्यकाल में उन्होंने लगातार देश के युवाओं को विज्ञान और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। डॉक्टर कलाम ने राष्ट्रपति रहते हुए प्रॉफिट बिल पर भी साइन किया, था जिसे वो अपने कार्यकाल का सबसे बड़ा फ़ैसला मानते थे। डॉक्टर कलाम एक सच्चे देशभक्त होने के साथ ही बहुत ही दयालु इंसान भी थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में 21 कैदियों की मौत की सज़ा पर रोक लगा दी थी, जिसके वज़ह से उन्हें काफ़ी आलोचना का भी शिकार होना पड़ा था।

विश्व छात्र दिवस- 

डॉक्टर कलाम को उनके अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा बहुत से अवॉर्ड देकर सम्मानित किया जा चुका है। भारत सरकार ने साल 1981 में उन्हें पद्म भूषण और साल 1990 में पद्म विभूषण देकर सम्मानित किया था। इसके बाद साल 1997 में उन्हें सरकार द्वारा भारत रत्न से सम्मानित किया गया। साल 2010 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने उनके जन्मदिन को ‘विश्व छात्र दिवस’ के रूप में घोषित कर के उन्हें सम्मानित किया।

अन्तिम समय:

साल 2007 में राष्ट्रपति के पद से हटने के बाद डॉक्टर कलाम बहुत से विश्वविद्यालयों के विजिटिंग प्रोफ़ेसर बन गए। वो चाहते थे कि दुनिया उन्हें एक अध्यापक के रूप में याद रखे।  कलाम साहब ने बहुत सी किताबें भी लिखी हैं, जिसमें उनके द्वारा लिखी गयी आत्मकथा ‘विंग्स ऑफ़ फायर’ लोगो के द्वारा काफ़ी पसन्द की गयी। इस क़िताब में डॉक्टर कलाम ने अपने संघर्ष की गाथा को खुद की ही कलम से लिखा है। 27 जुलाई 2015 को आईआईएम शिलॉन्ग में एक भाषण देने के दौरान अचानक ही उन्हें हार्ट अटैक आ गया और….भारत माता का ये सपूत अचेत होकर धरती की गोद मे गिर कर सदा के लिए सो गया।
डॉक्टर कलाम को उनके आदर्श और देश के विकास में दिए गए योगदान के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा।

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